गियर वाली साइकिल में गियर कैसे बदलते हैं? आसान तरीका
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है एक और नए article में। आज के इस article में हम बात करेंगे कि gear वाली cycle में gear actual में कैसे बदलते हैं, क्या तरीका रहता है, क्यों gear बदला जाता है, और कौन से समय पर कैसा gear रखना चाहिए। उसके बारे में बात करेंगे, तो स्वागत है आपका article में। चलिए शुरू करते हैं
गियर वाली साइकिल में गियर कैसे बदलते हैं? आसान तरीका
गियर वाली साइकिल तो ले ली। handle पर वो नंबर वाला डायल भी है, 1, 2, 3, और आगे तक। पर सच बताओ, आज तक उसे ठीक से समझा है क्या?
ज्यादातर लोग नहीं समझते। या तो पूरी साइकिल एक ही gear पर चलाते रहते हैं, या डर के मारे गियर छूते ही नहीं कि कहीं चेन ना उतर जाए। दोनों में गियर वाली साइकिल का पूरा फायदा बेकार चला जाता है।
गियर वाली साइकिल में गियर कैसे बदलते हैं, यह असल में उतना मुश्किल नहीं जितना वो नंबर देखकर लगता है। एक बार समझ गए तो चढ़ाई आसान हो जाती है, सीधी सड़क पर रफ्तार बढ़ जाती है, और टांगें कम थकती हैं। यह guide आपको सीधे-सादे तरीके से सिखाएगी, साथ में एक चलती-फिरती तस्वीर से भी दिखाएगी कि अंदर होता क्या है। gear wali cycle kaise chalaye, पूरा राज यहीं है।
चलो, शुरू से।
गियर होते क्यों हैं
पहले यह समझ लो कि गियर की जरूरत ही क्यों पड़ती है, फिर बाकी सब आसान लगेगा।
आपकी टांगों में एक तय ताकत है। चढ़ाई पर वही ताकत कम पड़ती है और pedal भारी हो जाता है, सीधी सड़क पर वही ताकत बच जाती है और आप तेज जा सकते हो। गियर का काम बस इतना है, आपकी उसी ताकत को रास्ते के हिसाब से ढालना।
चढ़ाई आई तो हल्का gear, pedal आसान हो जाता है (रफ्तार कम, पर चढ़ जाओगे)। सीधी सड़क या ढलान आई तो भारी gear, एक pedal में साइकिल ज्यादा दूर जाती है (रफ्तार तेज)। बस यही पूरा खेल है। सही gear वही है जिसमें pedal ना बहुत भारी लगे, ना पैर खाली-खाली घूमें।
आपकी साइकिल में कितने shifter हैं, पहले यह देखो
यह बात सबसे जरूरी है और ज्यादातर Hindi guide इसे गोल कर जाते हैं, जिससे लोग confuse होते हैं।
महंगी और पहाड़ी साइकिलों में handle पर दो shifter होते हैं, एक बायां और एक दायां। पर भारत में जो आम गियर वाली साइकिल मिलती है, उसमें अक्सर सिर्फ एक shifter होता है, दायां (right)। क्योंकि उसमें आगे एक ही chainring होता है और सारे gear पीछे वाले cassette पर होते हैं, नंबर 1 से 6 या 7 तक।
तो पहले अपने handle पर देखो।
| आपके पास क्या है | मतलब |
|---|---|
| सिर्फ दायां (right) shifter | सारे gear पीछे, नंबर 1 से 6/7। यही सबसे आम है। |
| बायां और दायां, दोनों | बायां आगे वाला (बड़े बदलाव), दायां पीछे वाला (छोटे बदलाव) |
अगर आपके पास सिर्फ दायां shifter है, तो नीचे की सारी बात उसी पर लागू होती है, और आपका काम और आसान है। दो shifter वाले थोड़ा और ध्यान दें।
कौन सा shifter क्या करता है
अब दोनों shifter का काम साफ-साफ। यह हर अच्छी साइकिल पर एक जैसा होता है।
| Shifter | क्या हिलाता है | कब इस्तेमाल करो |
|---|---|---|
| दायां (right) | पीछे वाले gear (cassette) | छोटे-छोटे बदलाव, रास्ता थोड़ा बदले तो |
| बायां (left) | आगे वाला (chainring) | बड़े बदलाव, अचानक तेज चढ़ाई या ढलान |
याद रखने का आसान तरीका। दायां हाथ रोज के छोटे बदलाव के लिए, बायां हाथ बड़े झटके वाले बदलाव के लिए। ज्यादातर वक्त आप बस दायां ही इस्तेमाल करोगे।
चेन असल में करती क्या है
अब सबसे मजेदार हिस्सा, जो शब्दों से ज्यादा एक तस्वीर से समझ आता है। जब आप shifter दबाते हो, तो नीचे एक छोटा सा पुर्जा (जिसे derailleur कहते हैं) चेन को धक्का देकर एक cog से दूसरे cog पर चढ़ा देता है।
पीछे वाले बड़े cog पर चेन हो तो pedal हल्का (चढ़ाई के लिए), छोटे cog पर हो तो pedal भारी (रफ्तार के लिए)। नीचे animation में यही होते देखो, चेन कैसे बड़े और छोटे cog के बीच ऊपर-नीचे होती है।
रास्ते के हिसाब से gear
जैसे रास्ता बदलता है, वैसे gear बदलो। चढ़ाई पर छोटा नंबर, ढलान पर बड़ा नंबर।
देखा? चेन का बस इतना ही काम है, बड़े और छोटे दांतों के बीच जगह बदलना। आप shifter दबाते हो, derailleur चेन को सरकाता है, और आपका pedal हल्का या भारी हो जाता है।
गियर बदलने का सही तरीका, 4 पक्के नियम
अब असली तरीका। ये चार बातें गांठ बांध लो, गियर वाली साइकिल की पूरी समझ इन्हीं में है।
- pedal चलाते हुए ही gear बदलो। यह सबसे जरूरी नियम है। चेन तभी दूसरे cog पर चढ़ती है जब वो घूम रही हो। रुकी हुई साइकिल पर या pedal रोककर gear बदलोगे तो चेन अटकेगी या उतर जाएगी।
- gear बदलते वक्त pedal पर जोर हल्का कर दो। पूरा जोर लगाते हुए gear बदलोगे तो चेन पर झटका पड़ता है और कट-कट होती है। एक पल के लिए pedal हल्का घुमाओ, gear बदलो, फिर जोर लगाओ।
- एक बार में एक ही gear बदलो। 1 से सीधे 5 पर मत कूदो। एक-एक करके बदलो, चेन को चढ़ने का वक्त दो।
- चढ़ाई आने से पहले gear बदलो, बीच में नहीं। चढ़ाई शुरू होते ही जब pedal भारी हो जाए, तब gear बदलना मुश्किल होता है। समझदारी यह है कि चढ़ाई दिखते ही, पहले से हल्के gear पर आ जाओ।
आखिरी नियम पर एक बात और। रास्ता आगे देखते रहो। चढ़ाई, ढलान, मोड़ जो भी आ रहा है, उसके हिसाब से पहले से gear तैयार रखो। यही आदत नए और पुराने रायडर का फर्क है।
कौन सा gear किस रास्ते पर
अब सीधा-सादा नक्शा, कि किस रास्ते पर कौन सा gear रखना है। “gear” से मतलब pedal का हल्का या भारी होना।
| रास्ता | कैसा gear | pedal कैसा लगेगा |
|---|---|---|
| तेज चढ़ाई | सबसे हल्का (नंबर 1-2) | हल्का, पर रफ्तार कम |
| हल्की चढ़ाई या खराब सड़क | हल्के से बीच वाला (2-3) | थोड़ा जोर |
| सीधी समतल सड़क | बीच वाला (3-4) | आराम की रफ्तार |
| ढलान या तेज जाना हो | भारी (5-6-7) | जोर, पर एक pedal में ज्यादा दूरी |
कोई “परफेक्ट gear” नहीं होता। जिस gear में pedal ना बहुत भारी लगे और ना पैर खाली घूमें, वही उस पल का सही gear है। रास्ता बदले, gear बदलो। यही आदत बना लो।
एक गलती जो चेन और gear दोनों खा जाती है: cross-chaining
अब वो गलती जिसका नाम भी ज्यादातर लोगों ने नहीं सुना, पर करते सब हैं। इसे cross-chaining कहते हैं।
यह सिर्फ उन साइकिलों पर होती है जिनमें आगे और पीछे दोनों जगह gear हैं (दो shifter वाली)। गलती यह है, चेन को आगे सबसे बड़े और पीछे भी सबसे बड़े पर एक साथ रखना, या आगे सबसे छोटे और पीछे सबसे छोटे पर। ऐसे में चेन तिरछी खिंचती है, टेढ़े कोण पर।
इससे दो नुकसान। चेन और gear जल्दी घिसते हैं, और चलते वक्त घर्र-घर्र या रगड़ की आवाज आती है। बचने का तरीका आसान, चेन को हमेशा कम से कम तिरछा रखो, यानी लगभग सीधी line में। आगे बड़े पर हो तो पीछे भी बड़े की तरफ वाले gear इस्तेमाल करो, आगे छोटे पर हो तो पीछे भी छोटे की तरफ। सिर्फ दायां shifter वाली आम साइकिल में यह दिक्कत होती ही नहीं, तो उन्हें बस पहले वाले 4 नियम याद रखने हैं।
[CONFIRM: मुझे भी शुरू में यही लगता था कि गियर जितना ऊंचा उतना अच्छा, तो मैं हमेशा सबसे ऊंचे नंबर पर चलाता था। नतीजा, हर छोटी चढ़ाई पर टांगें जवाब दे देती थीं। जिस दिन किसी ने बताया कि चढ़ाई पर नंबर घटाना होता है, उस दिन साइकिल चलाना सच में आसान हुआ।]
अगर चेन उतर जाए तो घबराओ मत
नए लोग गियर इसीलिए नहीं छूते कि चेन उतरने का डर रहता है। तो यह भी जान लो, चेन उतरना कोई बड़ी बात नहीं, और आपकी गलती भी नहीं होती हर बार।
अगर चेन उतर जाए, साइकिल रोको, नीचे झुको, और चेन को हाथ से (या किसी तिनके से, ताकि हाथ काले ना हों) आगे वाले chainring पर वापस चढ़ा दो, फिर pedal हल्का घुमाओ। ज्यादातर बार यह एक मिनट का काम है। बार-बार उतरे तो derailleur की setting बिगड़ी है, उसे mechanic से ठीक करवाओ। गियर की service और छोटे-मोटे खर्चे पर हम अलग से लिख रहे हैं, [INTERNAL-LINK: साइकिल की service में क्या होता है और कितने में]।
और अगर आप अब भी सोच रहे हो कि इतनी झंझट किसे चाहिए, तो एक ईमानदार बात। सादे शहर के रोज के आने-जाने के लिए गियर की जरूरत ही नहीं है, बिना गियर वाली single-speed ज्यादा आसान और भरोसेमंद है। गियर तब काम का है जब सच में चढ़ाई-उतराई वाला रास्ता हो। किस बजट में गियर लेना समझदारी है और किसमें नहीं, यह हमने अलग बताया है, [INTERNAL-LINK: ₹5000 के अंदर सबसे अच्छी साइकिल]।
FAQ
साइकिल में गियर कैसे बदलते हैं?
Handle पर लगे shifter को दबाकर या घुमाकर, और वो भी तब जब आप pedal चला रहे हो। दायां shifter पीछे वाले छोटे बदलाव के लिए, बायां (अगर है तो) आगे वाले बड़े बदलाव के लिए। gear बदलते वक्त pedal पर जोर हल्का कर दो।
क्या pedal रोककर गियर बदल सकते हैं?
नहीं। चेन तभी दूसरे gear पर चढ़ती है जब वो घूम रही हो। रुकी साइकिल पर या pedal रोककर gear बदलोगे तो चेन अटकेगी या उतर जाएगी। हमेशा pedal चलाते हुए, हल्के जोर से बदलो।
चढ़ाई पर कौन सा गियर रखना चाहिए?
सबसे हल्का gear, यानी छोटे नंबर (1 या 2)। इसमें pedal हल्का हो जाता है और चढ़ाई आसान, भले रफ्तार कम रहे। और gear चढ़ाई शुरू होने से पहले बदलो, बीच में नहीं, बीच में बदलना मुश्किल होता है।
मेरी साइकिल में बायां shifter नहीं है, क्या यह सही है?
हां, बिल्कुल सही है। भारत की ज्यादातर आम गियर वाली साइकिलों में आगे एक ही chainring होता है, इसलिए सिर्फ दायां shifter होता है और सारे gear पीछे। आपका काम और आसान है, बस दायां shifter इस्तेमाल करो।
Cross-chaining क्या है और इससे कैसे बचें?
यह तब होता है जब चेन आगे और पीछे दोनों सिरे वाले gear पर एक साथ हो, जिससे वो तिरछी खिंचती है और जल्दी घिसती है। बचने के लिए चेन को लगभग सीधी line में रखो। सिर्फ एक shifter वाली साइकिल में यह दिक्कत होती ही नहीं।
गियर वाली साइकिल हर किसी के लिए जरूरी है क्या?
नहीं। सादे शहर के रोज के इस्तेमाल के लिए बिना गियर वाली single-speed आसान और भरोसेमंद है। गियर तब फायदेमंद है जब रास्ते में चढ़ाई-उतराई हो। सस्ती गियर वाली साइकिल का घटिया gear set जल्दी दिक्कत देता है
गियर वाली साइकिल कोई पहेली नहीं, बस एक आदत है। cycle gear kaise badle यह समझ लो, तो चढ़ाई हल्की और सीधी सड़क तेज हो जाती है। शुरू में एक खाली मैदान में practice कर लो, pedal चलाते हुए नंबर बदलकर देखो कि pedal कब हल्का होता है और कब भारी। दो दिन में हाथ बैठ जाएगा, फिर आप कभी एक ही gear पर वापस नहीं जाओगे।
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