Train में साइकिल कैसे ले जाएं? Booking, खर्चा और packing की पूरी बात
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे एक और नए article में। आज के इस article में हम बात करेंगे कि आप अपनी साइकिल को Train में कैसे लेकर जा सकते हो, क्या है official तरीका और किस तरीके से आपको लेकर जाना है, जिससे आपका कम से कम खर्चा हो, कितना खर्चा लगेगा और क्या गलतियां नहीं करनी हैं। अगर आप वो गलतियां करोगे, तो आपकी साइकिल दूसरे शहर तक में भी फंस सकती तो उन गलतियों के बारे में भी बात करेंगे और पूरा तरीका बताएंगे कि कैसे आपको अपने साइकिल को एक शहर से दूसरे शहर लेकर जाना है। तो चलिए article की शुरुआत करते हैं।
Train में साइकिल कैसे ले जाएं? Booking, खर्चा और packing की पूरी बात
पढ़ाई या नौकरी के लिए शहर बदल रहे हो। सारा सामान तो bag में आ गया, पर वो साइकिल? जिस पर तीन साल college गए, वो यहीं छोड़ दें या साथ ले चलें?
ले जा सकते हो Train से, और सस्ते में बस तरीका पता होना चाहिए, वरना station पर घंटों भटकोगे और फिर भी काम नहीं होगा।
Train में साइकिल कैसे ले जाएं, इसकी पूरी जानकारी आज हम बताने वाले हैं, तो इसके mainly दो तरीके होते हैं:
कितना खर्चा आएगा? packing कैसे करनी है और क्या गलती नहीं करनी है, जिससे साइकिल खोने का डर रहता है?
सब आसान भाषा में हम आपको बताने वाले हैं।
पहले एक जरूरी बात, क्योंकि internet इस पर आपको उल्लू बना रहा है। जो भी page “railway parcel charge ₹800” या “₹1000” बताता है, वो bike यानी motorcycle का रेट है Motorcycle 150 किलो की होती है, आपकी साइकिल मुश्किल से 15-20 किलो साइकिल का खर्चा उससे बहुत, बहुत कम है।
दो रास्ते हैं: Luggage या Parcel
Okay, तो दोनों तरीकों के बारे में बात करते हैं। Railway की तरफ से आपको दो सुविधाएं दी जाती हैं। पहले इन दोनों सुविधाओं को समझ लो, then हम इसके बारे में बात करेंगे।
Luggage मतलब आप भी उसी train में सफर कर रहे हो जिसमें साइकिल जा रही है आपकी अपनी ticket है, और साइकिल आपके साथ, आपके साथ वाले डिब्बे में या luggage van में जाती है। यह सस्ता है और साइकिल आपके साथ-साथ पहुंचती है।
Parcel मतलब साइकिल जा रही है, पर आप नहीं जैसे घर से साइकिल किसी और शहर भिजवानी है, या आप flight से जा रहे हो और साइकिल train से आएगी। इसमें साइकिल अकेले सफर करती है, इसलिए थोड़ा खर्चा और इंतजार ज्यादा।
| बात | Luggage | Parcel |
|---|---|---|
| आप साथ हो? | हाँ, आपकी ticket जरूरी | नहीं, बिना ticket भी |
| खर्चा | कम | थोड़ा ज्यादा |
| कब पहुंचती है | आपके साथ या आस-पास | 2 से 7 दिन तक |
| कहाँ book | parcel office या luggage counter | parcel office |
अब ज्यादातर लोगों के लिए parcel ये मत लिखना काट देना इससे पहले। Don’t write anything that I already know. What I say, just write it.
ज्यादातर student और नौकरी वालों के लिए luggage वाला रास्ता ही सही है, क्योंकि आप उसमें खुद Train में जाते हो। सस्ता भी पड़ता है और सबसे उपयोगी भी वही है, तो उसके बादे में बात करेंगे। बाकी बीच-बीच में मैं आपको parcel वाली details भी बताता रहूंगा।
असली खर्चा कितना आता है
अब वो नंबर जिसके लिए आप यहाँ हो और यहीं ईमानदारी दिखानी जरूरी है।
एक owner ने कुछ साल पहले Kanpur से दिल्ली अपनी साइकिल luggage में भेजी थी उसकी अपनी ticket थी, तो साइकिल की booking हुई सिर्फ 30 रुपये में, और packing वालों ने 150 रुपये अलग लिए यानी कुल पौने दो सौ रुपये में साइकिल दूसरे शहर।
यह सुनकर अच्छा लगा? अब सच का दूसरा हिस्सा यह रेट दूरी, आपके station और साइकिल के वजन पर बदलता है, और यह कुछ साल पुराना है। आज यह ₹30 नहीं, शायद ₹50, ₹80 या थोड़ा ज्यादा हो सकता है पर एक बात पक्की है, यह सैकड़ों-हजारों में नहीं है, जैसा bike वाले pages डराते हैं।
मोटा-मोटी हिसाब यह समझ लो:
| चीज | कितना (अंदाजा) |
|---|---|
| Luggage booking (आपकी ticket के साथ) | ₹50 से ₹150 के बीच, दूरी पर |
| Packing/clamping station पर | ₹100 से ₹250 |
| Parcel (बिना ticket, अकेले भेजना) | luggage से ज्यादा, फिर भी सैकड़ों में |
कुल मिलाकर, ज्यादातर मामलों में साइकिल एक शहर से दूसरे शहर तीन-चार सौ रुपये के अंदर पहुंच जाती है। किसी packers-movers को ₹1500 देने की जरूरत नहीं।
Booking का पूरा तरीका, step by step
Station पर जाकर घबराना नहीं है। यह रहा पूरा तरीका booking करने का।
- Train छूटने से कम से कम 3-4 घंटे पहले station पहुंचो यह सबसे जरूरी बात है, आखिरी वक्त पर booking नहीं होती।
- Station पर parcel office या luggage office ढूंढो यह main platform से अलग, अक्सर किनारे पर होता है किसी से पूछ लो, हर बड़े station पर होता है।
- अपनी train ticket और एक ID (आधार) साथ रखो Luggage booking के लिए आपका उसी train में होना जरूरी है।
- साइकिल का weigh होगा, फिर form भरना होगा, फिर पैसे। बदले में एक रसीद मिलेगी। इस रसीद को जान से ज्यादा सँभालना, दूसरे शहर में साइकिल इसी से मिलेगी।
- Parcel भेज रहे हो (बिना ticket) तो चाहो तो पहले online भी कर सकते हो, IRCTC की parcel website (parcel.indianrail.gov.in) पर। वहाँ e-forwarding note बनता है, फिर साइकिल station पर देनी होती है।
एक बात कान खोलकर सुन लो। साइकिल भेजने से पहले उसकी 3-4 photo खींच लो, हर तरफ से। कहीं खरोंच या टूट-फूट पहले से है तो वो भी। अगर रास्ते में नुकसान हुआ तो यही photo आपका सबूत हैं। Railway की जिम्मेदारी बहुत सीमित होती है, इसलिए सबूत आपके पास होना चाहिए।
Packing: साइकिल को सफर के लिए तैयार करो
Train में साइकिल के ऊपर दूसरा सामान लदता है, धक्के लगते हैं। बिना packing भेजी तो दूसरे शहर मुड़े handle और टूटे mudguard के साथ मिलेगी।
Station के बाहर या parcel office के पास packing वाले बैठते हैं, जो पुराने बोरे और gatta लपेटकर clamp कर देते हैं। उनसे करवा लो, सस्ता और सही रहता है। खुद करना हो तो यह ध्यान रखो:
- Handle और seat के आसपास पुराना कपड़ा या bubble wrap लपेटो, यही सबसे पहले रगड़ खाते हैं
- Pedal अंदर की तरफ मोड़ दो या खोल दो, बाहर निकले pedal दूसरे सामान में फंसते हैं
- Chain पर एक पुराना कपड़ा बांध दो, वरना उसकी कालिख बाकी सामान पर लगेगी
- साइकिल पर एक कागज या gatta बांधो जिस पर कहाँ से कहाँ, और आपका नाम-नंबर साफ लिखा हो
- कोई ढीली चीज, जैसे pump, ghanti, light, उतारकर bag में रख लो, सफर में गिर जाती है
बारिश का मौसम है तो ऊपर एक plastic भी लपेट देना, पर साइकिल सूखी हो तब, वरना अंदर जंग की कहानी शुरू। जंग से बचाव पर हमने अलग से पूरा लिखा है, बारिश में साइकिल को जंग से कैसे बचाएं
वो एक गलती जिससे साइकिल खो जाती है
अब वो असली किस्सा जिससे सबक लेना है।
उसी Kanpur वाले owner की साइकिल, जो ₹30 में book हुई थी, उसी की train में नहीं गई Railway वालों ने बोल दिया, पीछे से आ जाएगी, शाम को आना। वो अगले दिन गया, कोई जवाब नहीं। दो दिन बाद पहुंचा तो बोले, ₹500 दो, टाइम पर क्यों नहीं ली। साइकिल मिली तो, पर धक्के, चक्कर और extra पैसे देकर।
इससे दो सबक हैं। पहला, luggage हमेशा उसी train में नहीं चढ़ती जिसमें आप हो, कई बार अगली available van में जाती है। इसलिए booking करते वक्त साफ पूछो कि साइकिल किस train से और कब पहुंचेगी।
दूसरा, दूसरे शहर पहुंचकर साइकिल जल्दी छुड़ा लो। रसीद लेकर वहाँ के parcel office जाओ, ID दिखाओ, साइकिल लो। ज्यादा दिन पड़ी रही तो railway रोज का रखवाली खर्च (demurrage) जोड़ देता है, वही ₹500 वाला झटका। पहुंचने के एक-दो दिन में छुड़ा लेना सबसे सही है।
किसके लिए यह सही है, किसके लिए नहीं
पुरानी पर अच्छी हालत वाली साइकिल, जिससे लगाव है। ले जाओ। तीन-चार सौ में पहुंच जाएगी, और नई लेने से सस्ता पड़ेगा।
₹3000-4000 वाली मामूली साइकिल, हालत भी ठीक-ठाक। सोच लो। Booking, packing और भागदौड़ मिलाकर जो खर्चा और वक्त लगेगा, उतने में नए शहर में वैसी ही पुरानी साइकिल OLX पर मिल जाएगी। पुरानी साइकिल परखने का तरीका हमने बताया है,
E-cycle है? यहाँ रुको। E-cycle की lithium battery को लेकर train में अलग नियम और सावधानियां हैं, हर battery ऐसे नहीं भेजी जा सकती। उसे इस तरह parcel करने से पहले railway से साफ पूछना जरूरी है, वरना booking से मना हो सकता है।
बहुत दूर का सफर, जैसे राजस्थान से दक्षिण भारत। Parcel में 5-7 दिन लग सकते हैं और धक्के ज्यादा। साइकिल कीमती हो तो packing अच्छी करवाओ और photo जरूर रखो।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Train में साइकिल ले जाने का कितना खर्चा आता है?
अगर आपकी अपनी ticket है और साइकिल luggage में जा रही है, तो booking अक्सर ₹50 से ₹150 के बीच होती है, ऊपर से packing का ₹100-250। दूरी और station पर रेट बदलता है, इसलिए अपने station के parcel office से पक्का पूछ लो। जो pages हजारों का खर्चा बताते हैं, वो bike का रेट है, साइकिल का नहीं।
साइकिल luggage में जाएगी या parcel में?
आप उसी train में सफर कर रहे हो तो luggage में, सस्ता पड़ता है। आप साथ नहीं जा रहे और साइकिल अकेले भेजनी है तो parcel में। दोनों की booking parcel office से होती है।
क्या बिना ticket के साइकिल भेज सकते हैं?
हाँ, उसे parcel कहते हैं। इसमें आपकी ticket की जरूरत नहीं, साइकिल अकेले सफर करती है। खर्चा luggage से थोड़ा ज्यादा और पहुंचने में 2-7 दिन लग सकते हैं।
साइकिल कितने घंटे पहले station पहुंचकर book करनी चाहिए?
train छूटने से कम से कम 3-4 घंटे पहले। parcel office पर weigh, form और packing में समय लगता है, आखिरी वक्त पर booking नहीं हो पाती।
दूसरे शहर पहुंचकर साइकिल कैसे मिलेगी?
Booking के वक्त मिली रसीद और अपनी ID लेकर उस शहर के parcel office जाओ। पहुंचने के एक-दो दिन में छुड़ा लेना, देर करोगे तो railway रोज का रखवाली खर्च जोड़ देता है।
क्या e-cycle को भी train से भेज सकते हैं?
इसमें सावधानी है। E-cycle की lithium battery को लेकर railway के अपने नियम हैं और हर battery ऐसे नहीं भेजी जा सकती। भेजने से पहले railway के parcel office से साफ पूछना जरूरी है।
साइकिल कोई मामूली सामान नहीं, कई बार सालों का साथी होती है। train me cycle kaise le jaye यह पता हो तो उसे पीछे छोड़ने की जरूरत नहीं। बस एक फोन अपने station के parcel office में घुमा लो, असली रेट पूछ लो, और रसीद सँभालकर रखो। बाकी सफर तो साइकिल की आदत है।
तो ये थी पूरी जानकारी कि आप अपनी साइकिल को रेल में कैसे लेकर जा सकते हो। उम्मीद है आपको ये article पसंद आया होगा। अगर पसंद आया हो, तो इसे अपने मित्रों के साथ जरूर साझा कीजिएगा। बाकी अगर आपके कोई सवाल हो, सुझाव हो या किसी अन्य topic जिन पर आप हमारी राय opinions जानना चाहते हो, तो आप नीचे comment में बता सकते हो। हम अवश्य कोशिश करेंगे कि उन सारे सवालों का जवाब वो हम आपको दें। ऐसे ही पढ़ते रहिए, आते रहिए, cyclebhaiya.com पर मिलते हैं किसी अगले article में। धन्यवाद!
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